अंधा-बेहरा सिस्टम
क्या आपको सबको पता है, इस तस्वीर की कीमत लगी है
कुछ 2-4 लाख रुपए
खरीददार है मध्य प्रदेश की बीमारू शासन प्रशासन की व्यवस्थाएं
तैयार रहिएगा
अब जांच होगी
समिति बनेगी
किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, ऐसा सुनने में आएगा
मौन रखा जायेगा
और बस
इससे ज्यादा कुछ नहीं
और सबक लेना तो शब्द ही नहीं इनकी डिक्शनरी में
भला इससे ज्यादा भयानक तस्वीर इस साल की कौन सी होगी, अपने आप में बोलती हुई तस्वीर, ऐसा लग रहा मानो आप सभी जानते हैं कल जबलपुर के बरगी डेम में जो हादसा हुआ यह उसका अंजाम है।
कही पर सही पढ़ा था, युद्ध कुछ देशों में चल रहा जिसमें लोगों की जाने जा रही है, और अगर हम ऐसे परिस्थिति में आते तो हम हमारी सेना के माध्यम जंग तो जीत लेंगे पर अपने गृह युद्ध, लाचार सिस्टम से नहीं जीत पाएंगे।
एक मां, क्या होती है इस तस्वीर से साफ समझ आता है,
एक उम्मीद क्या होती है इस तस्वीर से आप साफ समझ आता है
एक माँ का ममत्व का क्या होता है इस तस्वीर से आप साफ समझ सकते है और अपने बच्चों के प्रति समर्पण भाव क्या होता है इस तस्वीर से साफ समझ आता है।
15 घंटे बाद भी अपने बच्चे को इस प्रकार पकड़े रहना, ऐसा लग रहा मानो दोनों गहरी नींद में है उठते ही बोल पड़ेंगे।
यह घटना प्रकृति की उस माँ की गोद में घटित हुई घटना है जिसे मध्य प्रदेश की जीवनदायनी कहा जाता है उसकी एक चेतावनी है, हम जब अपने तीर्थ को टूरिज्म के रूप में विकसित करते हैं तो उसका अंजाम यही होता है, और बलि सिर्फ निर्दोष लोगों की चढ़ती हैं।
क्या यह सिर्फ एक घटना है, यहां कोई राजनीति करने वाली बात नहीं है पर आप यह देखिए कितने घंटे बाद यह तस्वीर जब सामने आई तो किस पत्थर दिल की आंखे नम नहीं होंगी। आखिर क्या गुनाह था ऐसा
सुनने में आया कि सुप्रीम कोर्ट ने सख़्त आदेश थे कि डीजल के क्रूज पर रोक लगाकर बंद करवाए, पर वो सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गए हैं।
उस माँ ने कैसे अपने बच्चे को जकड़ के रखा मानो इस उम्मीद में कि भले में डूब जाऊं पर उस बच्चे की जान बच जाए, या वो बच्चा मेरे से बिछड़ के कही नदी में बह न जाए।
यह कोई सामान्य घटना नहीं है, यह उस सिस्टम की हत्या है जिसने तीर्थ को तो टूरिज्म बना दिया पर जरूरी सावधानियां संसाधनों की कमी से यह दिन देखने आया।
जिन्होंने अपनी जान गंवा दी उनके ज़िंदगी जीने के कितने सपने होंगे, कितनी महत्वाकांक्षाए होंगी, उस बच्चे का जीवन पूरा सपनों से सजा हुआ था।
यह घटना उन सपनों की हत्या है।
कोई VIP आता है तो तमाम एम्बुलेंस डॉक्टर की टीम साथ चलती है, तमाम विभाग अलर्ट मोड पर रहते है, क्या इसलिए यह सब सर्कस देश की जनता देखने के लिए बची हैं।
सरकारें चुनाव में व्यस्त है, क्योंकि पूरे भारत में सरकार रहना चाहिए।
सरकारें बस नाम की रह गई है, सिस्टम वैसाखियां पर चल रहा है,
कही किसान परेशान, कही मजदूर परेशान, कोई आए या कोई जाए सब के सब हवा में तीर चलाने वाले हैं।
अब आगे समिति बनेगी
इसके बाद क्या रिपोर्ट आई, क्या कार्रवाई, क्या सजा सब के सब कुछ बस कागज़ों पर, कुछ महीनों पहले बस हादसा हुआ था, तुरंत आनन फानन में बसों की चेकिंग हुई, कौनसी बस फिट है या नहीं और आज वो बस भूतकाल बनकर रह गई।
10 मई को मदर्स डे हैं
इस तस्वीर के उस दिन को चरितार्थ किया हैं।
भगवान उन सबकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
#बरगीडेम
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