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जीवन से जिंदगी तक :- एक पहेली

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जीवन से जिन्दगी तक :- एक पहेली अमूमन यह दोनों शब्द एक दूसरे के पर्याय माने जाते हैं, पर बारीकी से देखा जाए तो दोनो अपनी-अपनी महत्ता पर राज कर रहे हैं। कैसे, आइए जानते है :-  ईश्वर सबको एक समान जीवन प्रदान करता है बिना कोई भेदभाव, जात-पात, रंग-रोगन, ऊंच-नीच, धर्म, को देखते हुए। उस जीवन को जिंदगी में हमे ढालना होता हैं, मतलब हमें खुद अपने एक समान जीवन के सफर को सबसे अलग कर जिंदगी की सड़क पर लाना हैं। इस संसार में हर कोई यह चाहता है की उसका जीवन सरलता से आसानी से निकलता रहे, पर अगर जीवन सरलता, सुगमता से निकल रहा है तो यकीन मानिए वो जीवन उस सीधी लकीर के बराबर है जिसे देख कर अस्पताल में डॉक्टर जवाब दे देते हैं। कवि जयशंकर प्रसाद जी की बड़ी सुंदर पंक्तियां हैं :- 'वह पथ क्या, पथिक कुशलता क्या, जिस पथ पर बिखरे शूल न हों,  नाविक की धैर्य परीक्षा क्या, जब धाराएँ प्रतिकूल न हों ।। जीवन में उतार-चढाव, सुख-दुख यह सब उतने ही जरूरी हैं जितने किसी चीज को मढ़ने के लिए उच्च तपिश। बस हम गलती यहा कर बैठते है की इन अस्थाई उतार-चढ़ाव को स्थाई समझ जीवन ही समझ बैठते हैं। बल्कि यह सिर्फ व...